Department of Hindi - R. Sankar Memorial Spectrum Seminar Series 2025-26



Sree Narayana College, Chempazhanthy

Department of Hindi

R.Sankar Memorial Spectrum Seminar Series 2025-26

 

 

Date: 22-November- 2025                           Place: Online platform

                                      Time: 7.00 pm

TOPIC: “Career Development in Hindi”

 



 As part of the prestigious R. Sankar Memorial Spectrum International Multidisciplinary Seminar Series for the 2025–26 academic year, the Department of Hindi at Sree Narayana College, Chempazhanthy, organized an insightful technical session. The seminar aimed to bridge the gap between academic study and professional application in the fields of linguistics and translation.

Session Highlights
The keynote speaker for the event was Ms. Vijaya Lekshmi S, who serves as a Junior Translator in the Office of the Principal Accountant General (A&E) Meghalaya, Shillong.
The session was particularly significant as it featured active participation from the student body:
  • Student Presentations: Four students from the department presented research papers, demonstrating academic rigor and engagement with multidisciplinary themes.
  • Felicitation: The session included a felicitation by Dr. Kiran Mohan and Smt. Saranya Raveendran (Assistant Professors of Malayalam), who acknowledged the efforts of the participants and the department in maintaining high academic standards.
Program Proceedings
  • Welcome Address: The session commenced with a warm welcome by Dr. Sreechithra V. S., Head of the Department, who introduced the guest speaker and set the context for the discussion.
  • Keynote Address: Ms. Vijaya Lekshmi S shared her professional expertise in translation, providing students with a practical perspective on career opportunities within the government sector.
  • Vote of Thanks: The program concluded with a vote of thanks delivered by Dr. Ajithra R. S., Assistant Professor of Hindi, expressing gratitude to the college administration, the speaker, and the attendees for making the seminar a success.







Abstract of paper presentation

 

पर्यावरण संरक्षण : जन जागरुकता और हिंदी साहित्य

Sivasanth S - S3-political Science

 

पर्यावरण मानव जीवन का आधार है। वायु, जल, भूमि, वन जीव जंतु और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलन ही जीवन को सुरक्षित और सुखद बनाता है। किंतु औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, जनसंख्या वृद्धि और उपभोक्तवाद के कारण पर्यावरण का तीव्र क्षण हो रहा है। ऐसे समय में पर्यावरण संस्क्षण के लिए जन - जागरूकता का निर्माण अत्यंत आवश्यक है। इस जागरूकता को फैलाने में हिंदी साहित्य ने ऐतिहासिक और प्रभावशाली भूमिका निभाई है।

 

      पर्यावरण संरक्षण का अर्थ है- प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, प्रदूषण पर नियंत्रण और जैव-विविधता की रक्षा। पर्यावरण असंतुलन के कारण जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, सूखा, बाढ़, महामारी और जैविक संकट जैसी समस्याएँ बढ़ रही हैं। यदि आज संस्क्षण नहीं किया गया, तो भविष्य की पीढ़ियों का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है। इसीलिए संरक्षण केवल वैज्ञानिक था सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक कर्तव्य है।

 

पर्यावरण संरक्षण और हिंदी साहित्य

Mekha R - S3 Mathematics

 

   पर्यावरण केवल हमारे चारों ओर मौजूद हवा, पानी और भूमि का नाम नहीं हैं, बल्कि यह हमारी संपूर्ण जीवन-व्यवस्था का आधार है। यदि पर्यावरण सुरक्षित है, तो हमारा अस्तित्व भी सुरक्षित हैं। लेकिन आधुनिक समय में मानव ने प्रगति के नाम पर प्रकृति का अत्यधिक दोहन किया है, जिसके कारण प्रदूषण, जलसंकट, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी भयावह समस्यायें उत्पन्न हो रही हैं। ऐसे समय में जन-जागरुकता अत्यंत आवश्यक हैं। जब तक प्रत्येक व्यत्ति पर्यावरण की रक्षा को अपने व्यक्तिगत कर्तव्य नहीं मानेगा, तब तक किसी भी प्रयास का सफल होना कठिन हैं। हमें यह समझना होगा कि छोटा-सा कदम भी बड़े परिवर्तन ला सकता है जैसे प्लास्टिक का कम उपयोग, पेड़ लगाना, पानी की बचत करना और ऊर्जा का सदुपयोग ।

 

पर्यावरण संरक्षण : जन जागरूकता और हिन्दी साहित्य  Aromal R Chandran -  S3 History

 

पर्यावरण संरक्षण में जन-जागरुकता और हिन्दी साहित्य का महत्वपूर्ण योगदान है। हिंदी साहित्य की रचनाएँ पर्यावरण के महत्व, प्रदूषण एवं उसकी सुरक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने का माध्यम l कविताओं, कहानियों, उपन्यासों और नाटकों के ज़रिये हिंदी साहित्य ने पर्यावरण चेतना को बढ़‌ावा दिया है। पर्यावरण संरक्षण तभी सम्भव है जब समाज के हर वर्ग में जागरुकता हो। हिन्दी साहित्य में ग्रामीण जीवन, प्रकृति सरंक्षण और पर्यावरणीय समस्याओं को विषय बनाकर जन-जागरुकता को बढ़ावा मिलता है। अनेक कवि और लेखक अपने साहित्य के माध्यम से पर्यावरणीय संकटों के प्रति लोगों को सचेत करते हैं और उनके सुधार के लिए प्रेषित करते हैं।

 

पर्यावरण संरक्षण : जन जागरूकता और हिन्दी साहित्य

S S Gowrinandana- S3 Mathematics

 

पर्यावरण वह आधार है जिस पर हमारा संपूर्ण जीवन टिका है। आज प्रदूषण, वनों की कटाई, जैव विविधता का क्षय और जल संकट मानव अस्तित्व केलिए चुनौती है l पर्यावरण संरक्षण का अर्थ है - प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना, प्रदूषण को कम करना l  पर्यावरण बचना केवल सरकार का कार्य नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का उत्तरदायित्व है। यदि प्रकृति स्वस्थ नहीं होगी, तो मानव जीवन भी सुरक्षित नहीं रह सकता l साहित्य मनुष्य को प्रगति के महत्व को समझने और उसे बचाने की प्रेरणा देता है और सब मिलकर जिम्मेदारी निभाएं प्रकृति का सम्मान करें ।

 

 

 

 


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